रचना चोरों की शामत

Sunday, 16 July 2017

चर्चित होंगे नाम विश्व में

चित्र से काव्य तक
जो बतियाते सिर्फ कलम से, अँधियारों में। 
वो कब छपते खबरों में या, अखबारों में।

नमन उन्हें जो, धर आते भर नेह उजाला
चुपके से इक दीप, तिमिर के ओसारों में।

राह दिखाते कोहरे-बरखा में जुगनू भी  
आब न होती जब नभ के चंदा तारों में।
     
छल-बल देर-सबेर विजित होंगे निर्बल से
लिप्त रहा करते जो कुत्सित व्यापारों में।

सधा हुआ ही राग बंधु! गाया जाएगा
सत्य-मंच पर गीतों में या अशयारों में।

चर्चित होंगे नाम विश्व में वे भी कल्पना
जो रचते इतिहास घरों की दीवारों में।

- कल्पना रामानी

3 comments:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल सोमवार (17-07-2017) को "खुली किताब" (चर्चा अंक-2669) पर भी होगी।
--
सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
--
चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

Onkar said...

सुन्दर रचना

Alokita said...

कल्पना जी पहली बार आना हुआ आपके ब्लॉग पर... आपकी रचना से यह पहला परिचय काफ़ी मनमोहक रहा
आशा करती हूँ आगे भी आपके ब्लॉग पर आकर कुछ अच्छा पढने को मिलेगा

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